ज़िन्दगी का हर पल ढलता चला जा रहा है और हम यूँ ही आस सजाये बैठे है. कब नयी सुबह होगी ..न जाने कितने सूरज आये और चले गए..हमे पता ही न चला.. क्यू की हमारी आँखे तो बंद थी.उसमे न ही सूरज की गलती थी न समय का ही दोष था.. अगर था तो बस उन आँखों और आस ka था जो इक दुसरे से ताल मेल न बिठा सकी.
🙏 जय श्री राम 🙏 🙏 अंतिम सांस ली रहे जटायु ने कहा कि मुझे पता था कि मैं रावण से नहीं जीत सकता लेकिन वह भी मैं लड़ा यदि मैं नहीं लड़ता तो आने वाली पीढ़ियां मुझे कायर कहते जब रावण जटायु के दोनों पंख काट डाले तो काल,आया और जैसे ही गिद्ध , राज,जटायु ने मौत को ललकार कहां खबरदार मृत्यु आगे बढ़ने की कोशिश मत करना मैं मृत्यु को स्वीकार तो कर लूंगा लेकिन तुम मुझे जब तक छू नहीं सकता जब तक मैं सीता जी की सुधि प्रभु श्री राम को नहीं सुना देता 🙏 🙏 मौत उसे छू,नहीं पा रही है काप रही है खड़े होकर मौत तब तक खड़ी रही कापती रही यही इच्छा मृत्यु का वरदान जटायु को मिला 🙏किंतु महाभारत के भीष्म पितामह 6 महीने तक बाण सैया पर लेट कर मौत का इंतजार करते रहे आंखों में आंसू हैं रो रहे हैं भगवान मन ही मन,मुस्कुरा रहे हैं 🙏 🙏कितना अलौकिक या दृश्य है रामायण में जटायु भगवान की गोदी रूपी शैया पर लेटे हैं प्रभु श्री राम रो रहे हैं और जटायु हंस रहे हैं 🙏 महाभारत में भीष्म रो रहे हैं और भगवान हंस रहे हैं भिन्नता परित हो रही है कि नहीं अंत समय में जटायु को प्रभु श्री राम की गोदी की सैया मिली लेकिन भीष्मा पिताम...
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