""सच्ची दोस्ती""

 



*सहज पके सो मीठा होय*


आज से 7 साल पहले एक दिन अचानक मैं दिल्ली मयूर विहार में एक बेहतरीन खाने के रेस्टोरेंट "दावत" में चला गया और मेन्यू देखकर मैंने कुछ खाना ऑर्डर किया।


लगभग 20 मिनट के बाद चंद युवा लोगों और सुंदर महिलाओं का एक समूह अंदर आया और उन्होंने भी वेटर को खाने का आदेश दिया। मुझे ये देखकर अत्यंत निराशा हुई कि इन लोगों को मुझसे पहले भोजन परोसा गया ।


मैंने देखा की वे सभी दिल खोल कर मुझपर,मेरी दशा पर हंसते रहे। भोजन का लुत्फ लेते रहे। उनमें से एक ने डींगे मारते हुए ऊंची आवाज में यहां तक कहा कि वह दावत रेस्टोरेंट में सभीसे परिचित है और उसकी यहाँ कितनी चलती है।


मैंने भोजन का इरादा त्याग कर इस रेस्टोरेंट को छोड़ने का फैसला किया। अपनी बर्दाश्त से बाहर इस अन्याय रूपी माहौल को झेलने से असमर्थ होकर मैंने वेटर को आवाज लगाई।


उसने तुंरन्त झुककर शालीनता से मुझसे कहा, “आपका आर्डर एक विशेष है, जिसे हमारे मालिक मुख्य शेफ के साथ मिलकर खुद तैयार कर रहे है।"


आप नाराज न हो, इस समूह का आर्डर तो अन्य विधार्थी स्टाफ ने तुंरन्त तैयार किया है क्योंकि उस समय स्वयं दावत के मालिक योगेश जी तथा मुख्य शैफ आपका आर्डर बनाने में व्यस्त थे।


'आप कृपया प्रतीक्षा करते हुए जूस का आनंद लीजिये तथा यहाँ की आंतरिक साज सज्जा का भी लुत्फ उठाइये”


उसके इस अत्यंत मृदुभाषी व्यवहार से प्रभावित होकर मैंने धैर्य से वहाँ बैठकर प्रतीक्षा की तथा कुछ ही समय बाद, मेरा भोजन 6 वेटरों द्वारा मेरी टेबल पर परोसा गया। मेरे लिए स्वयं, रेस्टोरेंट का मालिक (जो मेरा एक पुराना दोस्त योगेश उपाध्याय था) भोजन लेकर खड़ा था । उसने मुझे यहां घुसते हुए देख लिया था तथा मुझे अचंभित करने के उद्देश्य से भोजन स्वयम बनाया था। 


हम दोनों दोस्त सब भूलकर पहले गले मिले,खूब बातचीत की। उसने मेरे साधारण भोजन को पांच सितारा विशेष भोजन में बदल दिया। मेरा दिन बना दिया। लगभग सभी वेटर हमारे लिए आसपास खड़े रहे। इस बार दूसरे टेबल पर युवा पार्टी हैरान थी।


अब वे मुझे घूरना नहीं रोक पा रहे थे। अचानक वे बड़बड़ा भी रहे थे, पूछ रहे थे कि उन्हें भी इस तरह की सेवा और भोजन क्यों नहीं मिला। 


ऐसे ही हम सभी का जीवन है ! कुछ लोग आपसे आगे हैं और अभी खा रहे हैं, आप पर हंस रहे हैं और इस बारे में मजाक कर रहे हैं कि वे आपसे ज्यादा स्मार्ट, समझदार और बेहतर हैं, उनपर ईश्वर की कृपा है,उनका रुतबा हैं, उनके पास पैसा है और वे जीवन का भरपूर आनंद ले रहे हैं। 


*आप अवसर की अथक प्रतीक्षा कर रहे हैं ,चिंता में है कि सफलता में इतना समय क्यों लग रहा है, आप मजाक और अपमान सहते हैं, हो सकता है कि आप कभी हताश होकर आत्महत्या के बारे में भी सोचते हो, भीषण अवसाद से गुज़र रहे हों या गंभीर मानसिक चिंता का सामना करना पड़ रहा हो।*


*चिंता मत कीजिये ! ईश्वर देख रहा है और वह स्वयं चाहता हैं कि आपको उन लोगों की तरह एक साधारण भोजन न परोसा जाए जो आपका मजाक बना रहे हैं। आप लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि आपका एक भोजन विशेष है। जिसकी तैयारी में समय लगेगा और केवल मुख्य रसोइये उन्हें तैयार करेंगे। अपने भोजन की प्रतीक्षा करें,संयम बरते और आराम करें। ईश्वर की अनुकम्पा का धन्यवाद करे~अज्ञात~

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