jai ho...

 



अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो।

इस भव बंधन के भय से हमें उबारौ।


तुम कृपा सिंधु रघुनाथ नाथ हो मेरे ।

मैं अधम पड़ा हूँ चरण कमल पर तेरे।

हे नाथ। तनिक तो हमरी ओर निहारो।

अब कृपा करो …


मैं पंगु दीन हौं हीन छीन हौं दाता ।

अब तुम्हें छोड़ कित जाउं तुम्हीं पितु माता ।

मैं गिर न कहीं प्रभु जाऊँ आय सम्हारो।

अब कृपा करो …


मन काम क्रोध मद लोभ मांहि है अटका ।

मम जीव आज लगि लाख योनि है भटका ।

अब आवागमन छुड़ाय नाथ मोहि तारो।

अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो ॥



🙏 देवाधिदेव महादेव की जय हो🙏

वन्दे देव उमापतिं सुरुगुरु वन्दे जगत्कारणम,

वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनांपतिम।

वन्दे सूर्य शशांक वहिनयनं वन्चे मुकुन्दप्रिय:,

वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवशंकरम॥

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