Sambandh..
बड़प्पन वह गुण है जो पद से नहीं संस्कारों से प्राप्त होता है। परायों को अपना बनाना उतना मुश्किल नहीं होता, जितना अपनों को अपना बनाए रखना होता है।
Nobility is a quality that is derived from the rites, not from the post. It is not as difficult to make strangers to be ours, as to keep ours our own..
तुम संसार के सुखों का आडंबर कितना भी इकठ्ठा कर लो,लेकिन दुख से बचना असंभव है।क्योंकि उसी सुख से दुख सर उठा लेता है।वह सुख के भीतर ही तो समाया हुआ है।जिस सुख को तुम भोग रहे हो, उसे दुख से अलग करना ठीक वैसे ही असंभव है जैसे रात को दिन से अलग करना असम्भव है यह सुख तो तुम्हारे लिए उसका एक इशारा है कि यदि यहां सुख है,और जैसा कि तुम मानते भी हो,तो जरूर कहीं इस सुख का स्रोत अर्थात महासुख भी होगा।कहीं वह परम आनंद भी होगा। यही तो मैने तुमसे कहा कि उस परम आनंद की ही शरण लेने लायक है।अर्थात वही एक स्थान है जो पहुंचने या जाने के लायक है। उसी की शरण हो जाने का आयोजन है तुम्हारे जीवन का यह सारा प्रबंध उसी की शरण में जाने का आयोजन है।एक उसी की शरण मिल जाने की व्यवस्था है।जिस दिन उसकी परम शरण मिल जायेगी या उस परम समर्पण की अवस्था में चले जाओगे, तो समझ लेना उसी दीन से यह संसार और तुम्हारा जीवन रूपांतरित हो जाएगा ।तुमने तो उस शुद्ध आनंद से सीधे ही लेना शुरू कर दिया है जिसमे दुःख है ही नहीं।यही तो एकमात्र मार्ग है।
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अगर हम यह जान लें कि संबंध एक-दूसरे का ख्याल रखने के लिए बनाये जाते हैं, इस्तेमाल करने के लिए नहीं तो हमारे रिश्ते हमेशा चलते रहते हैं।
If we know that relations are made to take care of one-another, not to be used, then our relationship goes on forever.
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Good thoughts
ReplyDeleteThanks.
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